Sunday, 30 October 2016

Diwali real image by nasa released in 2012 only.

NASA, the national space agency of the U.S., on Thursday released a black and white satellite imagery of India Diwali night 2012, cautioning people against the fake image in circulation on the social media.

“On November 12, 2012, the Visible Infrared Imaging Radiometer Suite (VIIRS) on the Suomi NPP satellite captured this night-time view of southern Asia,” NASA said releasing a picture of India on this Diwali night.

“The image is based on data collected by the VIIRS ‘day- night band’, which detects light in a range of wavelengths from green to near-infrared. The image has been brightened to make the city lights easier to distinguish,” it said.

NASA said most of the bright areas in the imagery released by it are cities and towns in India. “India is home to more than 1.2 billion people and has 30 cities with populations over 1 million,” it said.

Cities in Bangladesh, Nepal, and Pakistan are also visible near the edges of the image.

“An image that claims to show the region lit for Diwali has been circulating on social media websites and the Internet in recent years. In fact, it does not show what it claims.

That image, based on data from the Operational Linescan System flown on US Defense Meteorological Satellite Program (DMSP) satellites, is a colour—composite created in 2003 by NOAA scientist Chris Elvidge to highlight population growth over time,” NASA said.

“In that image, white areas show city lights that were visible prior to 1992, while blue, green, and red shades indicate city lights that became visible in 1992, 1998, and 2003 respectively,” it said.

“In reality, any extra light produced during Diwali is so subtle that it is likely imperceptible when observed from space,” NASA said.

Saturday, 29 October 2016

एक दीप

🙏🏻नमस्कार 🙏🏻
🎁आपको दीवाली की बहुत बहुत वधाई।🎁
📄कृपया सन्देश पूरा पढ़ें 📃👇

दोस्तों आज हम सुरक्षित अपने घरों में अपने परिवार के साथ
बैठ कर दीवाली का  त्यौहार सेलिब्रेट कर  रहे है इसका श्रेय सीमा पर तैनात हमारे उन जवानों को जाता है।
जो कड़ी मुश्किलों का सामना करते हुए हमारी रक्षा करतें है।
जैसा की आप तरह तरह के massage शेयर कर रहे हैं ।तो क्या हम एक massage हमारे उन जवानो को दे सकते हैं।
जो अपनी जान की परवाह न करते हुए । देश और देश के हर नागरिक की रक्षा के लिए मर मिटने को तैयार रहते हैं।
दोस्तों ये मत सोचे आपके एक massage से क्या होगा क्योंक़ि हमारा एक एक जवान जब दुश्मनों का सामना करता है तो वो ये नही सोचता की उसके अकेले करने से क्या होगा।
तो दोस्तों अपना त्यौहार ख़ुशी से मनाएं और उन्हें भी अपनी खुशियों में शामिल करें। और देश की आन वान और शान के लिए  शहीद नौजवानों की याद में एक दीप अवशय जलाएँ।
आप अपना massage http://www.amarjawanjyoti.com/ website पर जाकर पोस्ट कर सकतें है।
🔜इस massage को अधिक से अधिक शेयर करें ।🔜
🙏🏻धन्यवाद🙏🏻
हैप्पी दीवाली।
जय हिन्द !!जय जवान!!

Thursday, 24 March 2016

Safalta ka Mul mantra सफलता का मूल मन्त्र

सफ़लता का मूल मन्त्र 
safal kaise ho
सफल हम सभी होना चाहते हैं,  लेकिन हमारे सफल होने की सम्भावना कितनी है safal hone ka mool mantar क्या है, क्यों हम में से बहुत से लोग सफल होने में नाकाम हो जाते हैं, कुछ तो फार्मूला होगा सफल होने का। जब मैंने ये जानना चाहा तो मेरे दिमाग में सबसे पहले वही आया जो  अक्सर 90% लोगो के दिमाग में आता है कि हार्ड वर्क ही सफलता का मूल मन्त्र होगा।  मुझे बहुत  खुशी  हुई  के मुझे सफलता का मूल मन्त्र मिल गया।  मैंने भी बहुत जगह ये ही सुना और पढ़ा था कि safalta ka koi shortcut nhi हैं कड़ी मेहनत करो सफलता आपके कदम चूमेगी।  मुझे भी यही लगने लगा कि कड़ी मेहनत ही सफलता का मूल मन्त्र है। 
 लेकिन मेरी यह  खुशी ज्यादा समय टिक न सकी। 

 जब  मैँ अपनी गली में रहने वाले एक रिक्शा वाले से मिला।  वो  बेचारा पिछले 30 साल से रिक्शा चला कर अपने परिवार का पेट तो भर रहा था।  परन्तु अपना घर बनाने का सपना पूरा करने में नाकाम , अपने बच्चों को अच्छी एजुकेशन दे पाने में नाकाम, पिछले 5 साल से बेटी का रिश्ता  नहीं हो पा रहा था।  तो मेरे कहने का तात्प्रिय  है कि इतना हार्ड वर्क करने के बाबजूद भी वो असफल था।  तो यहाँ से मुझे एक बात तो स्प्ष्ट  हो गई कि हार्ड वर्क तो सफलता का मूल मन्त्र नहीं हो सकता।

  मेरी तलाश अभी भी वही की वही कि आखिर क्या है सफलता का मूल मन्त्र। इसी खोज में मैंने उन लोगो की लिस्ट बनानी शुरू कर दी जो सफल हैं और हर कदम पर सफल हैं, और उन लोगो से मिलना शुरू कर दिया।  मैं जिससे भी मिलता उसका काम करने का तरीका  और उसका प्रतिदिन का schedule अपनी डायरी में नोट कर रहा था। और मैं उन लोगो से भी मिला जो उन्ही लोगो के प्रोफेशन का  काम कर रहे थे लेकिन असफल थे। तो क्या रिजल्ट सामने आया क्या अंतर्  था उन लोगो में जो एक जैसे काम में सफल थे और जो उसी काम में असफल थे।

 तो एक चीज जो मैंने देखी कि सफल व्यक्ति  हार्ड वर्क करता है और असफल भी हार्ड वर्क करता है , तो इसका मतलब  हार्ड वर्क एक सीडी तो है सफलता की लेकिन मूल मन्त्र नहीं।  उनमें से बहुत से ऐसे भी थे जो Hard Work  नहीं करते तो भी सफल थे , तो आखिर फार्मूला क्या है सफलता का।  तो मैंने जो चीज common देखी सफल लोगो में वो  क्या थी वो थी सफल लोगों कि आदत।  सफल लोग अपने काम को काम नहीं kaam ki aadat बना लेते हैं।  आदत बना लेते हैं सुबह जल्दी उठने को, आदत बना लेते हेैं सुबह समय पर ऑफिस जाने की , आदत बना लेते हैं schedule लिखने की, आदत बना लेते है वादे करने और वादे कर के निभाने की , आदत बना लेते हैं सेविंग करने की, आदत बना लेते हैं असफल न होकर सफल होने की।  जिन लोगो से मैं मिला उन में से एक ने मुझ से पूछा आपका दिल करता है सुबह जल्दी उड़ने का मैंने बोल नहीं, बोला मेरा भी नहीं करता, परन्तु मेरी आदत है जल्दी उठने  की  तो उठना पड़ता है बोला आपका दिल करता है योगा करने का, मैंने बोला ना, बोला मेरा भी नहीं करता लकिन जब तक ना करूं बेचैन रहता हूँ , बोला आपका दिल करता है रात को books पढने का , बोला मेरा भी नहीं करता लेकिन जब तक एक दो घंटे books न पढ़  लूँ नींद ही नहीं आती।  तो मुझे कन्फर्म हो गया बस यही सफलता का मूल मन्त्र हैं।  होता सफल लोगों के साथ भी वही है जो असफल लोगों के साथ होता है , लेकिन सफल लोग काम को काम ना समझ कर काम को अपनी आदत बना लेते हैं, असफल लोग काम को काम की तरह लेते हैं आज हो गया तो ठीक नहीं कल कर लेंगे , कल हो गया तो ठीक नहीं परसों कर लेंगे।  और सफल लोगों की आदत में होता है कि जब तक वो उस काम को कर न लें उनके दिल को सुकून नहीं मिलता।  तो दोस्तो यही है सफलता का असली मूल मन्त्र।  काम को काम नहीं अपनी आदत बनाओ आप कभी असफल नहीं होंगे।  रही बात उस रिक्शे वाले कि रिक्शे वाले की भी आदत नहीं थी सुबह जल्दी उठना , और आदत नहीं थी 9 बजे रिक्शा स्टैंड पर ले जाना दिन में जब दिल किया चला जाना और जब नहीं किया तो नहीं भी।  अगर आप भी सफल होना चाहते हो तो आदत बना लो अपने काम को अपनी, आदत बना लो खुद को update रखने की , तो मेरा वादा है आपसे, आप कभी असफल नहीं होंगे।

Saturday, 15 August 2015

करोड़पति बनना सभी चाहते हैं लेकिन बनते कौन हैं....

एक अच्छी गाड़ी एक अच्छा बंगला और अच्छे रिश्ते सभी के सपने होते हैं। सभी चाहते
हैं कि वो करोड़पति बनें। तो क्या सभी करोड़पति बन पाते है क्या सभी वो सपने पुरे कर
पाते हैं जो वो देखते हैं। नहीं ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जो अपने देखे सपनो को पूरा
करते हैं। अधिकतर लोग हालातों के साथ समझोता कर लेते हैं। सपनों को पूरा करने के
लिए हम सबसे पहले अपना एक लक्ष्य तय करते हैं। लक्ष्य भी सभी तय कर ही लेते हैं।
लेकिन बात आती है उस लक्ष्य को हासिल करने की।
तो जो लोग अपने लक्ष्य को हासिल कर पाते हैं और जो नही कर पाते उनमे बस एक ही
फर्क होता है। वो होता है फोकस का। लक्ष्य जितना बड़ा होता है। उसको हासिल करने
 में कठिनाइयां भी उतनी ही बड़ी आती हैं। अधिकतर लोग कठिनाईयो का सामना नहीं
कर पाते और हालातों के साथ समझोता कर लेते हैं। और आसान रास्ता ढूंढना शुरू
कर देते हैं। जो अपने लक्ष्य को हासिल करते है वो कभी हालातों के साथ समझोता नही
करते । उनको सिर्फ और सिर्फ एक ही चीज दिखती है जो उनको हासिल करनी है । और
सुबह उठते रात को सोते बस एक ही ख्याल दिमाग में होता है। दूसरे कामों को भी वक्त
देते हैं बस उतना जितने में वो काम पूरा हो जाये बस। लेकिन focus एक ही जगह रहता
है चाहे कितनी भी मुशीबत या रुकावटें क्यों न आएं वो हार नही मानते । और ज्यादा
मजबूत होते चले जाते हैं। और एक दिन वो उनकी मुठ्ठी में होता है जो वो चाहते हैं और
बन  जाते हैं बादशाह! और
ऐसे बहुत से उदाहरण आप स्वयं जानते हैं।

Friday, 14 August 2015

क्या आप अब भी कहोगे की आजादी गांधी ने दिलवाई?


शायद इतिहास में यही पढ़ाया जाता है कि
गाँधीजी. . .आइये आज जानते है
उनकी कुछ महानताए
@ महानता 1. . . . . .शहीद-ए-आजम भगतसिंह
को फांसी दिए जाने पर अहिंसा के महान
पुजारी गांधी ने कहा था. . .‘हमें ब्रिटेन के
विनाश के बदले अपनी आजादी
नहीं चाहिए।’’ और आगे कहा. . .‘‘भगतसिंह
की पूजा से देश को बहुत हानि हुई और हो
रही है वहीं (फांसी) इसका
परिणाम गुंडागर्दी का पतन है। ऐसे बदमाशो को
फांसी शीघ्र दे दी जाए ताकि 30
मार्च से करांची में होने वाले कांग्रेस अधिवेशन में कोई
बाधा न आवे" ।
अर्थात् गांधी की परिभाषा में
किसी को फांसी देना हिंसा नहीं
थी ।
@ महानता 2 . . . . . . इसी प्रकार एक ओर
महान्क्रा न्तिकारी जतिनदास को जब आगरा में अंग्रेजों ने
शहीद किया तो गांधी आगरा में
ही थे और जब गांधी को उनके पार्थिक
शरीर पर माला चढ़ाने को कहा गया तो उन्होंने साफ
इनकार कर दिया अर्थात् उस नौजवान द्वारा खुद को देश के लिए
कुर्बान करने पर भी गांधी के दिल में
किसी प्रकार की दया और सहानुभूति
नहीं उपजी, ऐसे थे हमारे
अहिंसावादी गांधी।
@ महानता 3 . . . . . जब सन् 1937 में कांग्रेस अध्यक्ष के
लिए नेताजी सुभाष और गांधी द्वारा
मनोनीत सीतारमैया के मध्य मुकाबला हुआ
तो गांधी ने कहा. . .यदि रमैया चुनाव हार गया तो वे
राजनीति छोड़ देंगेलेकिन उन्होंने अपने मरने तक
राजनीति नहीं छोड़ी जबकि
रमैया चुनाव हार गए थे।
@ महानता 4 . . . . . .इसी प्रकार गांधी
ने कहा था. . . . .“पाकिस्तान उनकी लाश पर बनेगा”
लेकिन पाकिस्तानउनके समर्थन से ही बना । ऐसे थे
हमारे सत्यवादी गांधी ।
@ महानता 5 . . . . . . इससे भी बढ़कर
गांधी और कांग्रेस ने दूसरे विश्वयुद्ध में अंग्रेजों का
समर्थन किया तो फिर क्या लड़ाई में हिंसा थी या लड्डू
बंट रहे थे ? पाठक स्वयं बतलाएं ?
@ महानता 6 . . . . . .गांधी ने अपने
जीवन में तीन आन्दोलन (सत्याग्रह)
चलाए और तीनों को ही बीच में
वापिस ले लिया गया फिर भी लोग कहते हैं कि
आजादी गांधी ने दिलवाई।
@ महानता 7 . . . . .इससे भी बढ़कर जब देश के
महान सपूत उधमसिंह ने इंग्लैण्ड में माईकल डायर को मारा तो
गांधी ने उन्हें पागल कहा इसलिए नीरद
चौधरी ने गांधी को दुनियां का सबसे बड़ा
सफल पाखण्डी लिखा है।
@ महानता 8 . . . . . इस आजादी के बारे में
इतिहासकार CR मजूमदार लिखते हैं “भारत की
आजादी का सेहरा गांधी के सिर बांधना
सच्चाई से मजाक होगा।
यह कहना कि सत्याग्रह व चरखे से आजादी दिलाई
बहुत बड़ी मूर्खता होगी।
इसलिए गांधी को आजादी का
‘हीरो’ कहना उन क्रान्तिकारियों का अपमान है
जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना
खून बहाया। ”यदि चरखों की आजादी
की रक्षा सम्भव होती है तो बार्डर पर
टैंकों की जगह चरखे क्यों नहीं रखवा दिए
जाते. . . . . .?
अगर आप सहमत है तो इसकी सच्चाई "Share"
कर देश के सामने पाखण्डी को उजागर करें।. . . . .
.जय हिन्द. . . . .जय भारत
शहीदे आज़म भगत सिंह को फांसी कि
सजा सुनाई जा चुकी थी, इसके कारण
हुतात्मा चंद्रशेखर आज़ाद काफी परेशान और चिंतित हो
गए।
भगत सिंह की फांसी को रोकने के लिए
आज़ाद ने ब्रिटिश सरकार पर दवाब बनाने का फैसला लिया इसके लिए
आज़ाद ने गांधी से मिलने का वक्त माँगा लेकिन
गांधी ने कहा कि वो किसी
भीउग्रवादी से नहीं मिल
सकते।
गांधी जानते थे कि अगर भगतसिंह और आज़ाद जैसे
क्रन्तिकारी और ज्यादा दिन जीवित रह गए
तो वो युवाओं के हीरो बन जायेंगे। ऐसी
स्थिति में गांधी को पूछनेवाला कोई ना रहता।
हमने आपको कई बार बताया है कि किस तरह गांधी ने
भगत सिंह को मरवाने के लिए एक दिन पहले फांसी
दिलवाई। खैर हम फिर से आज़ाद कि व्याख्या पर आते है।
गांधी से वक्त ना मिल पाने का बाद आज़ाद ने नेहरू से
मिलने का फैसला लिया , 27 फरवरी 1931 के दिन
आज़ाद ने नेहरू से मुलाकात की।
ठीक इसी दिन आज़ाद ने नेहरू के सामने
भगत सिंह की फांसी को रोकने
की विनती की।
बैठक में आज़ाद ने पूरी तैयारी के साथ भगत
सिंह को बचाने का सफल प्लान रख दिया।
जिसे देखकर नेहरू हक्का -बक्का रह गया क्यूंकि इस प्लान के
तहत भगत सिंह को आसानी से बचाया जा सकता था।
नेहरू ने आज़ाद को मदद देने से साफ़ मना कर दिया इस पर आज़ाद
नाराज हो गए और नेहरू से जोरदार बहस हो गई फिर आज़ाद
नाराज होकर अपनी साइकिल पर सवार होकर अल्फ्रेड
पार्क की होकर निकल गए।
पार्क में कुछ देर बैठने के बाद ही आज़ाद को पोलिस ने
चारो तरफ से घेर लिया। पोलिस पूरी तैयारी के
साथ आई थी जेसे उसे मालूम हो कि आज़ाद पार्क में
ही मौजूद है।
@ आखरी साँस और आखरी
गोली तक वो जाबांज अंग्रेजो के हाथ नहीं
लगा ,आज़ाद की पिस्तौल में जब तक गोलियाँ बाकि
थी तब तक कोई अंग्रेज उनके करीब
नहीं आ सका।
आखिरकार आज़ाद जीवन भरा आज़ाद ही
रहा और उस ने आज़ादी में ही
वीरगति को प्राप्त किया।
अब अक्ल का अँधा भी समझ सकता है कि नेहरु के
घर से बहस करके कर पार्क में 15 मिनट अंदर
भारी पोलिस बल आज़ाद को पकड़ने के लिए बिना नेहरू
की गद्दारी के नहीं पहुँचा जा
सकता था।
नेहरू ने पोलिस को खबर दी कि आज़ाद इस वक्त पार्क
में है और कुछ देर वहीं रुकने वाला है। साथ
ही कहा कि आज़ाद को जिन्दा पकड़ने की
भूल ना करें नहीं तो भगतसिंह
की तरफ मामला बढ़ सकता है।
लेकिन फिर भी कांग्रेस कि सरकार ने नेहरू को किताबो में
बच्चो का क्रन्तिकारी चाचा नेहरू बना दिया और आज
भी किताबो में आज़ाद को "उग्रवादी" लिखा
जाता है।
लेकिन आज सच को सामने लाकर उस जाँबाज को आखरी
सलाम देना चाहते हो तो इस पोस्ट को शेयर करके सच्चाई को
सभी के सामने लाने में मदद करें।

Wednesday, 24 June 2015

Law of attraction की सच्चाई

Law of Attraction....

Law of attraction के बारे में सभी ने सुना होगा। अगर नही सुना तो The Secret
Movie देख लीजिये। 

क्या कहता है Law of attraction...

Law of attraction के अनुसार हम जो भी हैं जैसे भी हैं । हमारी अपनी सोच के 
द्वारा निर्मित है। तो क्या आपको यह बात ठीक लगती है । कि इंसान उसकी सोच 
द्वारा निर्मित प्राणी है.... जी हाँ इसमें कोई दोहरायय नही कि इंसान उसकी सोच 
द्वारा निर्मित प्राणी है। हम जो भी हैं हमारी सोच का नतीजा हैं चाहे वो हमारी 
आर्थिक स्तिथि हो या स्वास्थ्य। हमारी सोच का ही नतीजा है।
हम जिन चीजी के बारे में सचते हैं वही हमारी तरफ आकर्षित होती रहती है।
अगर हम अच्छे स्वस्थय के बारे में सोचेंगे तो स्वस्थ ही रहेंगे। अगर हम पैसे के 
बारे में सोचेंगे तो हम ज्यादा पैसे को आकर्षित करेंगे और वो आपके पास आएगा भी। लेकिन कुछ लोग इस बात पर विशवास नही करतें। कहते है अगर सिर्फ सोचने
से पैसा आता तो सभी के पास आ जयेगा फिर समस्या क्या है। तो फिर कमाने की 
जरूरत ही क्या है सोचो और पैसा पाओ।।।।।
तो उनके लिए मेरा एक सीधा सा उत्तर है कि आप इस श्रेणी से बहार हो...
 पानी हमारे लिए जरूरी है क्या हम सिर्फ और सिर्फ पानी से जी सकते हैं?
हवाहवा हमारे लिए जरूरी है क्या हम सिर्फ हवा से जी सकते है?
भोजन हमारे लिए जरूरी है क्या हम सिर्फ भोजन खाकर जी सकते हैं?
उत्तर होगा नही कभी नहीं।
तो इसी तरह सिर्फ सोच से आप अपने लक्ष्य पर नही पहुच सकते। उसके लिए जो
जरूरी काम है वो तो आपको करने ही होंगे । हाँ इतना जरूर है कि सकारात्मक
सोचने से आप उस काम को असानी से पाओगे और कामयाबी जल्द मिलेगी और 
वो सभी चीजें आपकी तरफ आकर्षित होंगी जो आपके लक्ष्य के लिए जरुरी है।
और आप अपने लक्ष्य तक पहुच जाओगे।
तो सकारात्मक सोचे और बढतेजाएँ।